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I want to new thing. And innovative  idea. I will give some new story poem also .now it’s my first step. It’s only trile..

पंख 

पंख 

पंख काट कर जमाना कहता है कि उड़ के दिखा 

अँधेर कमरे में धागा लगा के सुई में दिखा 

समंदर की मझधार में तुफानो से लड़ के दिखा 

आंधियो के मंजर में अपनी झोपड़ी बचा के दिखा 

आग की लपटों में मुस्कुरा के दिखा 

अँधेरो में एक रौशनी फैला कर तो दिखा ।

जिंदगी 

जब भी कोई अपना हमे प्यार करता है । तो यही है जिंदगी ।

जब भी कोई अपना हमारे लिए जीता हे ।तो यही जिंदगी ।

हम किसी के लिए जिए तो ये हैं जिंदगी 

किसी के प्यार में पागल हो तो ये है जिंदगी 

बस हर एक दुवा में कोई शामिल हो तो यही हैं जिंदगी ।

पृथ्वीराज चौहान

जिनके नाम में ही राज था

वो ही पृथ्वीराज चौहान था

1166 का जन्म था अजमेरु जन्म स्थान था

सोमेष्वर की छत्र छाया में

कर्पूर के आँचल में पला

राजस्थान की माटी को

उस शूरवीर पर नाज था

राजपूताने की शान वो

एक वीर योद्धा था

विरासत में मिला नाना (दिल्ली ) का शासन

फिर अजमेरु उसकी शान था

8 वर्ष की उम्र में दिल्ली का जिस पे जिसका अधिकार था

वो ही शूरवीर पृथ्वीराज चौहान था

बचपन में ही जिनके हाथो में तीर थी

चंद्र बदाई की मित्रता का जिनके पास उपहार था

अजमेरु की शान का उनका ही आगाज था

नागार्जुन का दमन और चालुक्य पर विजय का गाज था

अजमेरु का ऐसा वीर पुत्र पृथिवीराज चौहान था

भंडानको का दमन और

चन्देलों पर एक तलवार था

वो तो वीर योद्धा पृथिवीराज चौहान था

पीठ दिखा कर भाग गया गोरी

जिस वीर के पराक्रम से

वो तो शूरवीर सयोगिता का भरतार था

जिस के नाम में ही राज हे

वो तो वीर योद्धा पृथिवीराज चौहान था
अन्जी कानावत

खुला परिंदा

में एक खुला परिंदा हु 

आसमा से बाते करता हु 

आंधी हो या तूफान 

अपनी ह प् चलता हूं 

मेरी जिंदगी ही एक तूफान है 

मै हवा से बातें करता हु 

बिजलिया रोक ले मुझे 

अगर हौसला है उनमें तो 

में भी कम नही 

उनकी चमक से नही डरता हूँ 

एक जिद है मेरी 

तुफानो से लड़ने की 

एक वजह है मेरी 

आसमा से बाते करने की 

जिंदगी तो हर परिंदा जीता है 

एक जिद हे मेरी 

नया इतिहास रचने की 

मुझे तो मेरा इतिहास बनना है 

दम तुफानो में तो रोक के दिखये 

बिना पँखो के भी 

अब तो नया इतिहास बनेगा 

तुफानो से टकरा कर भी 

एक नया अंदाज बनेगा 

क्यों की एक अकेले परिंदे में 

जान होती है 

जिंदगी जीने का भी एक अलग 

अंदाज होता है 

क्यों की में एक खुला परिंदा हु 

             लेखक 

                       अन्जी कानावत 

सफलता 

सफलता नाम सुनते ही सब को अच्छा लगता है 

सब उस व्यक्ति की तरह बनना चाहते हे ज्यो की सफल हुआ  हे 

परन्तु ये कोई नही सोचता की इस सफलता को कैसे पाया है उसने । सभी सिर्फ उसके साक्षात्कार को देख के अंदाज लगा लेते हे की ये सफल होके कितना खुश है 

परन्तु उसके मन की व्यथा को कोई नही जानता । की इस सफलता के लिए उसने कितने रिश्तो को छोड़ना पड़ा 

कितनी जिलते झेलनी पड़ी ।

कितनी मेहनत करनी पड़ी ।

कितने लोगो को अनजाने में दुःख पहुचाना पडा ।

कैसे मन को स्थिर रखन तो उसे रखना पडा ।

सफलता दिखने में और सुनने में जितनी सुन्दर लगती है 

उतनी ही कड़वे सच वाली होती है 

परन्तु ये कड़वा सच कोई भी सफल व्यक्ति नही बताता है 

ये कहावत तो आप ने सुनी ही होगी 

कुछ पाने के लिए कुछ  खोना पड़ता हे

परन्तु मेरे हिसाब से सफल व्यक्ति सफल होते होते अकेला रह जाता है 

दुनिया उस कोसने लगती है 

और जब वो सफल होता है तो दुनिया उसके तलवे के नीचे होती है  

परन्तु य सफर उसे दुनिया से अलग बना देता है 

ये एक कड़वा सच है 

                   अंजी कानावत

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